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mahabharat 1.139.33: सियार की आज्ञा पाकर सभी साथी (बाघ आदि) नदी पर (स्नान करने) चले गए। इस बीच सियार वहीं किसी विचार में खोया हुआ खड़ा रहा।   |   mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.139.33 
शृगालवचनात् तेऽपि गता: सर्वे नदीं तत:।
स चिन्तापरमो भूत्वा तस्थौ तत्रैव जम्बुक:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
सियार की आज्ञा पाकर सभी साथी (बाघ आदि) नदी पर (स्नान करने) चले गए। इस बीच सियार वहीं किसी विचार में खोया हुआ खड़ा रहा।
 
At the command of the jackal, all the companions (tiger etc.) went to the river (to bathe). Meanwhile the jackal remained standing there lost in some thought.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)