श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.139.20 
अङ्कुशं शौचमित्याहुरर्थानामुपधारणे।
आनाम्य फलितां शाखां पक्वं पक्वं प्रशातयेत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘कार्य की सफलता के लिए स्वच्छता और सदाचार आदि का पालन एक प्रकार का अंकुश (लोगों को आकर्षित करने का साधन) बताया गया है।’ मनुष्य किसी वृक्ष के पके फलों को उसकी फलों से लदी शाखा को अपनी ओर झुकाकर ही तोड़ सकता है।
 
‘For the success of the task, following cleanliness and good conduct etc. has been described as a kind of check (means to attract people). A man can pluck the ripe fruits of a tree only by bending its branch laden with fruits towards himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)