Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.15: शत्रु को उसके माँगे अनुसार वस्तुएँ देकर तथा दान देकर उस पर विश्वास उत्पन्न करके मार डालना चाहिए। इसी प्रकार जो शत्रु पूर्वकाल में दुष्ट शत्रु था और बाद में दास बन गया है, उसे भी जीवित नहीं छोड़ना चाहिए। शत्रु के त्रिवर्ग 1, पंचवर्ग 2 और सप्तवर्ग 3 का समूल नाश कर देना चाहिए॥15॥ | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रु को उसके माँगे अनुसार वस्तुएँ देकर तथा दान देकर उस पर विश्वास उत्पन्न करके मार डालना चाहिए। इसी प्रकार जो शत्रु पूर्वकाल में दुष्ट शत्रु था और बाद में दास बन गया है, उसे भी जीवित नहीं छोड़ना चाहिए। शत्रु के त्रिवर्ग 1, पंचवर्ग 2 और सप्तवर्ग 3 का समूल नाश कर देना चाहिए॥15॥
‘An enemy should be killed by giving him whatever he asks for and by creating trust in him through donations. Similarly, an enemy who was a bad enemy in the past and later became a servant should also not be left alive. The Trivarga 1, Panchvarga 2 and Saptvarga 3 of the enemy should be completely destroyed.॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥