दया न तस्मिन् कर्तव्या शरणागत इत्युत।
निरुद्विग्नो हि भवति नहताज्जायते भयम्॥ १४॥
अनुवाद
किसी व्यक्ति पर यह सोचकर दया नहीं करनी चाहिए कि वह मेरी शरण में आया है । शत्रु को मारकर ही राजा निर्भय हो सकता है । यदि शत्रु को न मारा जाए, तो उससे भय सदैव बना रहता है ॥14॥
One should not show mercy to a person thinking that he has come to me for refuge. Only by killing the enemy can a king become fearless. If the enemy is not killed, then the fear from him always remains.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥