श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.139.14 
दया न तस्मिन् कर्तव्या शरणागत इत्युत।
निरुद्विग्नो हि भवति नहताज्जायते भयम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
किसी व्यक्ति पर यह सोचकर दया नहीं करनी चाहिए कि वह मेरी शरण में आया है । शत्रु को मारकर ही राजा निर्भय हो सकता है । यदि शत्रु को न मारा जाए, तो उससे भय सदैव बना रहता है ॥14॥
 
One should not show mercy to a person thinking that he has come to me for refuge. Only by killing the enemy can a king become fearless. If the enemy is not killed, then the fear from him always remains.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)