Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.77: राजन! इस प्रकार अनेक जनपदों से समृद्ध अहिच्छत्र नामक नगर को युद्ध में जीतकर अर्जुन ने उसे गुरु-दक्षिणा के रूप में द्रोणाचार्य को दे दिया। 77॥ | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं राजन्नहिच्छत्रा पुरी जनपदायुता।
युधि निर्जित्य पार्थेन द्रोणाय प्रतिपादिता॥ ७७॥
अनुवाद
राजन! इस प्रकार अनेक जनपदों से समृद्ध अहिच्छत्र नामक नगर को युद्ध में जीतकर अर्जुन ने उसे गुरु-दक्षिणा के रूप में द्रोणाचार्य को दे दिया। 77॥
Rajan! In this way, after conquering the city named Ahicchhatra, which was rich in many districts, in the war, Arjun gave it to Dronacharya as Guru-Dakshina. 77॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि द्रुपदशासने सप्तत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें द्रुपदपर द्रोणके शासनका वर्णन करनेवाला एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३७॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ८४ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥