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mahabharat 1.137.61: तब अर्जुन ने कहा- भैया भीमसेन! राजाओं में श्रेष्ठ द्रुपद कौरव योद्धाओं के सगे-संबंधी हैं, अतः उनकी सेना का संहार न करो; केवल राजा द्रुपद को गुरुदक्षिणा के रूप में द्रुण को दे दो॥61॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.137.61 
अर्जुन उवाच
सम्बन्धी कुरुवीराणां द्रुपदो राजसत्तम:।
मा वधीस्तद्‍बलं भीम गुरुदानं प्रदीयताम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने कहा- भैया भीमसेन! राजाओं में श्रेष्ठ द्रुपद कौरव योद्धाओं के सगे-संबंधी हैं, अतः उनकी सेना का संहार न करो; केवल राजा द्रुपद को गुरुदक्षिणा के रूप में द्रुण को दे दो॥61॥
 
Then Arjun said – Brother Bhimsen! Drupada, the best among kings, is a relative of the Kaurava warriors, hence do not kill their army; Only give it to Druna in the form of Gurudakshina to King Drupada. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)