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mahabharat 1.137.55: उसने पांचाल राजा का धनुष काट डाला, उसकी ध्वजा भी भूमि पर गिरा दी, फिर पाँच बाणों से उसके घोड़ों और सारथि को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  1.137.55 
तस्य पार्थो धनुश्छित्त्वा ध्वजं चोर्व्यामपातयत्।
पञ्चभिस्तस्य विव्याध हयान् सूतं च सायकै:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उसने पांचाल राजा का धनुष काट डाला, उसकी ध्वजा भी भूमि पर गिरा दी, फिर पाँच बाणों से उसके घोड़ों और सारथि को घायल कर दिया।
 
He cut the bow of the Panchala king and also dropped his flag on the ground. Then with five arrows he wounded his horses and charioteer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)