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mahabharat 1.137.42-43: उस समय पांडव सेना जयजयकार कर रही थी। इसी बीच, पांचाल नरेश द्रुपद ने अपने भाई सत्यजित के साथ मिलकर अर्जुन पर बड़े वेग से आक्रमण किया, जैसे शम्बरासुर ने देवराज इंद्र पर आक्रमण किया था। किन्तु कुंतीपुत्र अर्जुन ने बाणों की भारी वर्षा करके पांचाल नरेश को ढक लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  1.137.42-43 
सिंहनादश्च संजज्ञे साधुशब्देन मिश्रित:।
तत: पञ्चालराजस्तु तथा सत्यजिता सह॥ ४२॥
त्वरमाणोऽभिदुद्राव महेन्द्रं शम्बरो यथा।
महता शरवर्षेण पार्थ: पाञ्चालमावृणोत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय पांडव सेना जयजयकार कर रही थी। इसी बीच, पांचाल नरेश द्रुपद ने अपने भाई सत्यजित के साथ मिलकर अर्जुन पर बड़े वेग से आक्रमण किया, जैसे शम्बरासुर ने देवराज इंद्र पर आक्रमण किया था। किन्तु कुंतीपुत्र अर्जुन ने बाणों की भारी वर्षा करके पांचाल नरेश को ढक लिया।
 
At that time, the Pandava army was roaring with praise and cheers. Meanwhile, Panchal king Drupada along with his brother Satyajit attacked Arjuna with great speed, just like Shambarasur had attacked Devraj Indra. But Kunti's son Arjuna showered a heavy shower of arrows and covered the Panchal king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)