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mahabharat 1.137.17-19h: द्रुपद के भयंकर बाण चारों दिशाओं में उड़ने लगे। महाराज! उनकी विजय देखकर पांचालों के घरों में शंख, भेरी और मृदंग आदि सहस्त्रों वाद्य एक साथ बजने लगे। आत्म-विश्वास से संपन्न पांचाल सैनिक ज़ोर-ज़ोर से गर्जना करने लगे। साथ ही उनके धनुष की टंकार की गूँज आकाश में गूँजने लगी।   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 17-19h
 
 
श्लोक  1.137.17-19h 
द्रुपदस्य शरा घोरा विचेरु: सर्वतो दिशम्।
तत: शङ्खाश्च भेर्यश्च मृदङ्गाश्च सहस्रश:॥ १७॥
प्रावाद्यन्त महाराज पाञ्चालानां निवेशने।
सिंहनादश्च संजज्ञे पाञ्चालानां महात्मनाम्॥ १८॥
धनुर्ज्यातलशब्दश्च संस्पृश्य गगनं महान्।
 
 
अनुवाद
द्रुपद के भयंकर बाण चारों दिशाओं में उड़ने लगे। महाराज! उनकी विजय देखकर पांचालों के घरों में शंख, भेरी और मृदंग आदि सहस्त्रों वाद्य एक साथ बजने लगे। आत्म-विश्वास से संपन्न पांचाल सैनिक ज़ोर-ज़ोर से गर्जना करने लगे। साथ ही उनके धनुष की टंकार की गूँज आकाश में गूँजने लगी।
 
Drupada's fierce arrows started flying in all directions. Maharaj! Seeing his victory, thousands of musical instruments like conch, bheri and mridanga started playing simultaneously in the houses of the Panchalas. The Panchala soldiers, endowed with great self-confidence, started roaring loudly. Along with that, the loud twang of their bowstrings started echoing in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)