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mahabharat 1.137.10: महाराज यज्ञसेन (द्रुपद) और उनके सब भाइयों ने कवच धारण कर लिए। फिर वे सब बाण बरसाते हुए बड़े जोर से गर्जना करने लगे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.137.10 
ततस्तु कृतसंनाहा यज्ञसेनसहोदरा:।
शरवर्षाणि मुञ्चन्त: प्रणेदु: सर्व एव ते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज यज्ञसेन (द्रुपद) और उनके सब भाइयों ने कवच धारण कर लिए। फिर वे सब बाण बरसाते हुए बड़े जोर से गर्जना करने लगे॥10॥
 
Maharaja Yajnasen (Drupada) and all his brothers wore armor. Then all of them started roaring loudly while showering arrows.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)