श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.135.9 
पार्थ यत् ते कृतं कर्म विशेषवदहं तत:।
करिष्ये पश्यतां नॄणां माऽऽत्मना विस्मयं गम:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! इन दर्शकों के सामने आपने जो अद्भुत कार्य किये हैं, उनसे भी अधिक अद्भुत कार्य मैं करूँगा। इसलिए आप अपने पराक्रम का अभिमान न करें।'॥9॥
 
'Kuntinandan! I will perform even more wonderful deeds than what you have done in front of these spectators. Therefore, do not be proud of your prowess.'॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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