श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.135.41 
एवमुक्तस्तत: कर्णस्तथेति प्रत्युवाच तम्।
हर्षाच्चोभौ समाश्लिष्य परां मुदमवापतु:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उसके ऐसा कहने पर कर्ण ने 'तथास्तु' कहकर उससे मित्रता कर ली। फिर दोनों ने बड़े हर्ष से एक-दूसरे को गले लगाया और आनंद से भर गए ॥ 41॥
 
On his saying this, Karna said 'Tathastu' and made friendship with him. Then both of them embraced each other with great joy and became filled with bliss. ॥ 41॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि कर्णाभिषेके पञ्चत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें कर्णके राज्याभिषेकसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३५॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४३ १/२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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