वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात शत्रुओं के नगर को जीतकर आए कुन्तीपुत्र अर्जुन द्रोणाचार्य की आज्ञा पाकर तुरन्त ही अपने भाइयों को गले लगाकर युद्ध के लिए कर्ण की ओर चल पड़े।
Vaishmpayana says - O King! Thereafter, Kunti's son Arjun, who had conquered the enemy's city, taking the orders of Drona, immediately embraced his brothers and proceeded towards Karna for the battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥