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mahabharat 1.134.29: महाराज! क्षण भर में ही उस सभागृह में बैठे हुए लोगों के मन में उपर्युक्त विचार आने लगे। उस समय सभी दर्शक अपना मुख फेरकर द्वार की ओर देखने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.134.29 
रङ्गस्यैवं मतिरभूत् क्षणेन वसुधाधिप।
द्वारं चाभिमुखा: सर्वे बभूवु: प्रेक्षकास्तदा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! क्षण भर में ही उस सभागृह में बैठे हुए लोगों के मन में उपर्युक्त विचार आने लगे। उस समय सभी दर्शक अपना मुख फेरकर द्वार की ओर देखने लगे।
 
King! Within a moment, the above thoughts started coming to the minds of the people sitting in that auditorium. At that time, all the spectators turned their faces and started looking towards the door. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)