श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.134.21 
क्षणात् प्रांशु: क्षणाद् ह्रस्व: क्षणाच्च रथधूर्गत:।
क्षणेन रथमध्यस्थ: क्षणेनावतरन्महीम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वह क्षण भर में बहुत लंबा हो जाता और क्षण भर में बहुत छोटा। एक क्षण में वह रथ के धुरी पर खड़ा होता और अगले ही क्षण रथ के बीच में दिखाई देता। फिर पलक झपकते ही धरती पर उतर आता और अस्त्र-शस्त्र से अपना कौशल दिखाने लगता।
 
He would become very tall in a moment and very short in a moment. In one moment he would be standing on the axle of the chariot and the next moment he would be seen in the middle of the chariot. Then in the blink of an eye he would come down to earth and start showing his skill with weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)