श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.134.17 
धृतराष्ट्र उवाच
धन्योऽस्म्यनुगृहीतोऽस्मि रक्षितोऽस्मि महामते।
पृथारणिसमुद्‍भूतैस्त्रिभि: पाण्डववह्निभि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - हे महामुने! कुन्तीरूपी अग्नि से प्रकट हुए इन तीन पाण्डवरूपी अग्नियों से मैं धन्य हूँ। इन तीनों से मैं पूर्णतया धन्य और रक्षित हूँ॥ 17॥
 
Dhritarashtra said - O great one! I am blessed by these three fires in the form of Pandavas which appeared from the fire in the form of Kunti. I am completely blessed and protected by these three.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)