श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.131.8 
ततोऽर्जुनं तदा मूर्ध्नि समाघ्राय पुन: पुन:।
प्रीतिपूर्वं परिष्वज्य प्ररुरोद मुदा तदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब आचार्य ने बार-बार अर्जुन का सिर सूँघा, प्रेमपूर्वक उसे गले लगाया और हर्ष से रोने लगे ॥8॥
 
Then the Acharya smelled Arjun's head again and again, embraced him lovingly and began to cry in joy. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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