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श्लोक 1.131.79  |
अन्यांश्च शिष्यान् भीमादीन् राज्ञश्चैवान्यदेशजान्।
तथा च सर्वे तत् सर्वं पश्याम इति कुत्सिता:॥ ७९॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने भीम आदि शिष्यों तथा वहाँ शिक्षा प्राप्त कर रहे अन्य देशों के राजाओं से भी यही प्रश्न पूछा। प्रश्न के उत्तर में उन सभी ने (युधिष्ठिर के समान) कहा - 'हम सब कुछ देख रहे हैं।' यह सुनकर आचार्य ने उन सबको डाँटकर भगा दिया। 79. |
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| He asked the same question to other disciples like Bhima and kings of other countries who were getting education there. In reply to the question, all of them (like Yudhishthira) said - 'We are seeing everything.' On hearing this, the Acharya rebuked them all and sent them away. 79. |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि द्रोणशिष्यपरीक्षायामेकत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें आचार्य द्रोणके द्वारा शिष्योंकी परीक्षासे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३१॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ८० श्लोक हैं।) |
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