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mahabharat 1.131.77: उसका उत्तर सुनकर द्रोणाचार्य अप्रसन्न हो गए और उसे डांटते हुए कहा, 'यहाँ से चले जाओ, तुम इस लक्ष्य को नहीं भेद सकते।'   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.131.77 
तमुवाचापसर्पेति द्रोणोऽप्रीतमना इव।
नैतच्छक्यं त्वया वेद्धुं लक्ष्यमित्येव कुत्सयन्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
उसका उत्तर सुनकर द्रोणाचार्य अप्रसन्न हो गए और उसे डांटते हुए कहा, 'यहाँ से चले जाओ, तुम इस लक्ष्य को नहीं भेद सकते।'
 
On hearing his reply, Dronacharya became displeased and rebuked him saying, 'Go away from here, you cannot hit this target.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)