श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.131.75 
द्रोण उवाच
अथ वृक्षमिमं मां वा भ्रातॄन् वापि प्रपश्यसि॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
द्रोण बोले - क्या तुम इस वृक्ष को देखते हो, मुझे या अपने भाइयों को भी?॥75॥
 
Drona said - Do you see this tree, me or even your brothers?॥ 75॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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