श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.131.61 
द्रोणस्य तु तदा शिष्यौ गदायोग्यौ बभूवतु:।
दुर्योधनश्च भीमश्च सदा संरब्धमानसौ॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रोण के दो शिष्य गदायुद्ध में बड़े कुशल सिद्ध हुए - दुर्योधन और भीमसेन। वे दोनों सदैव एक-दूसरे के प्रति क्रोध (प्रतिस्पर्धा) से भरे रहते थे॥ 61॥
 
At that time two disciples of Drona proved to be very capable in mace fighting- Duryodhan and Bhimsen. Both of them were always filled with anger (competition) towards each other.॥ 61॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas