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mahabharat 1.131.54-55h: राजा! तब द्रोणाचार्य ने एकलव्य से यह कहा- ‘वीर! यदि तुम मेरे शिष्य हो तो मुझे गुरु-दक्षिणा दो।’ यह सुनकर एकलव्य बहुत प्रसन्न हुआ और इस प्रकार बोला।   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  1.131.54-55h 
ततो द्रोणोऽब्रवीद् राजन्नेकलव्यमिदं वच:।
यदि शिष्योऽसि मे वीर वेतनं दीयतां मम॥ ५४॥
एकलव्यस्तु तच्छ्रुत्वा प्रीयमाणोऽब्रवीदिदम्।
 
 
अनुवाद
राजा! तब द्रोणाचार्य ने एकलव्य से यह कहा- ‘वीर! यदि तुम मेरे शिष्य हो तो मुझे गुरु-दक्षिणा दो।’ यह सुनकर एकलव्य बहुत प्रसन्न हुआ और इस प्रकार बोला।
 
King! Then Dronacharya said this to Eklavya- 'Valiant! If you are my disciple then give me Guru-Dakshina'. Hearing this, Eklavya became very happy and spoke thus. 54 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)