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mahabharat 1.131.48: अर्जुन ने कहा - आचार्य ! उस दिन आपने मुझे गले लगाकर बड़ी प्रसन्नता से कहा था कि मेरा कोई भी शिष्य आपसे श्रेष्ठ नहीं होगा ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.131.48 
अर्जुन उवाच
तदाहं परिरभ्यैक: प्रीतिपूर्वमिदं वच:।
भवतोक्तो न मे शिष्यस्त्वद्विशिष्टो भविष्यति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा - आचार्य ! उस दिन आपने मुझे गले लगाकर बड़ी प्रसन्नता से कहा था कि मेरा कोई भी शिष्य आपसे श्रेष्ठ नहीं होगा ॥48॥
 
Arjun said - Acharya! That day you embraced me and said with great pleasure that none of my disciples will be better than you. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)