श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.131.46 
वैशम्पायन उवाच
ते तमाज्ञाय तत्त्वेन पुनरागम्य पाण्डवा:।
यथावृत्तं वने सर्वं द्रोणायाचख्युरद्‍भुतम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं - हे राजन! उस निषाद का वास्तविक परिचय पाकर पाण्डव लौट आये और उन्होंने द्रोणाचार्य से वन में घटित हुई सारी आश्चर्यजनक घटनाएँ कह सुनाईं।
 
Vaishmpayana says - O King! After getting the true identity of that Nishad, the Pandavas returned and narrated to Dronacharya all the amazing events that had happened in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)