vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा
»
श्लोक 44
श्लोक
1.131.44
न चैनमभ्यजानंस्ते तदा विकृतदर्शनम्।
अथैनं परिपप्रच्छु: को भवान् कस्य वेत्युत॥ ४४॥
अनुवाद
उस समय उसका रूप बदल गया था। पाण्डव उसे पहचान न सके; अतः उन्होंने पूछा - 'तुम कौन हो, किसके पुत्र हो?'॥44॥
At that time his appearance had changed. The Pandavas could not recognize him; so they asked - 'Who are you, whose son are you?'॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×