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mahabharat 1.131.43: राजन! तत्पश्चात् वन में वनवासी वीर को खोजते हुए पाण्डवों ने उसे निरन्तर बाण चलाते देखा॥43॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.131.43 
तं ततोऽन्वेषमाणास्ते वने वननिवासिनम्।
ददृशु: पाण्डवा राजन्नस्यन्तमनिशं शरान्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् वन में वनवासी वीर को खोजते हुए पाण्डवों ने उसे निरन्तर बाण चलाते देखा॥43॥
 
Rajan! After that, while searching for the forest dweller Veer in the forest, the Pandavas saw him continuously shooting arrows. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)