श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.131.41 
स तु श्वा शरपूर्णास्य: पाण्डवानाजगाम ह।
तं दृष्ट्वा पाण्डवा वीरा: परं विस्मयमागता:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उसका मुख बाणों से भरा हुआ था और उसी अवस्था में वह पाण्डवों के पास आया। उसे देखकर वीर पाण्डवों को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
His mouth was filled with arrows and in that condition he came to the Pandavas. Seeing him the brave Pandavas were very surprised.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)