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mahabharat 1.131.4: महाधनुर्धर द्रोण ने प्रसन्न होकर उन धृतराष्ट्रपुत्रों और पाण्डवों को शिष्य रूप में स्वीकार किया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.131.4 
स ताञ्शिष्यान् महेष्वास: प्रतिजग्राह कौरवान्।
पाण्डवान् धार्तराष्ट्रांश्च द्रोणो मुदितमानस:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाधनुर्धर द्रोण ने प्रसन्न होकर उन धृतराष्ट्रपुत्रों और पाण्डवों को शिष्य रूप में स्वीकार किया॥4॥
 
Drona, the great archer, became happy and accepted those Dhritarashtra sons and the Pandavas as disciples. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)