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mahabharat 1.131.28: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने पुनः अर्जुन को घोड़े, हाथी, रथ और भूमि पर युद्ध करने की शिक्षा देनी आरम्भ की॥28॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.131.28 
वैशम्पायन उवाच
ततो द्रोणोऽर्जुनं भूयो हयेषु च गजेषु च।
रथेषु भूमावपि च रणशिक्षामशिक्षयत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने पुनः अर्जुन को घोड़े, हाथी, रथ और भूमि पर युद्ध करने की शिक्षा देनी आरम्भ की॥28॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, Dronacharya again started teaching Arjuna to fight on horses, elephants, chariots and on land. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)