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श्लोक 1.131.27  |
द्रोण उवाच
प्रयतिष्ये तथा कर्तुं यथा नान्यो धनुर्धर:।
त्वत्समो भविता लोके सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| द्रोण बोले- अर्जुन! मैं ऐसा प्रयत्न करूँगा कि इस संसार में कोई दूसरा धनुर्धर तुम्हारे समान न हो। मैं तुमसे यह सत्य कह रहा हूँ॥ 27॥ |
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| Drona said- Arjun! I will try to do such a thing that no other archer in this world will be like you. I am telling you this truth.॥ 27॥ |
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