श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.131.27 
द्रोण उवाच
प्रयतिष्ये तथा कर्तुं यथा नान्यो धनुर्धर:।
त्वत्समो भविता लोके सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
द्रोण बोले- अर्जुन! मैं ऐसा प्रयत्न करूँगा कि इस संसार में कोई दूसरा धनुर्धर तुम्हारे समान न हो। मैं तुमसे यह सत्य कह रहा हूँ॥ 27॥
 
Drona said- Arjun! I will try to do such a thing that no other archer in this world will be like you. I am telling you this truth.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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