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श्लोक 1.131.26  |
तस्य ज्यातलनिर्घोषं द्रोण: शुश्राव भारत।
उपेत्य चैनमुत्थाय परिष्वज्येदमब्रवीत्॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| भरत! द्रोण ने सोते समय उसके धनुष की टंकार सुनी, तब वे उठकर उसके पास गए और उसे गले लगाकर बोले॥ 26॥ |
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| Bhaarat! Drona heard the twirling of his bow while he was asleep. Then he got up and went to him and hugged him and said.॥ 26॥ |
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