श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.130.24 
वीटां च मुद्रिकां चैव ह्यहमेतदपि द्वयम्।
उद्धरेयमिषीकाभिर्भोजनं मे प्रदीयताम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
देखो, मैं तुम्हारे कंचे और यह अंगूठी दोनों काँटों से निकाल सकता हूँ। तुम सब लोग मेरी जीविका का प्रबन्ध करो।॥24॥
 
‘Look, I can take out both your marbles and this ring from the thorns. You all arrange for my livelihood.’॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)