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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा
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श्लोक 58
श्लोक
1.129.58
तमब्रवीन्महात्मा स सर्वक्षत्रियमर्दन:॥ ५८॥
अनुवाद
यह सुनकर समस्त क्षत्रियों का नाश करनेवाले महाबली परशुरामजी उससे इस प्रकार बोले॥58॥
On hearing this, the great Parasurama, the destroyer of all Kshatriyas, spoke to him thus:॥ 58॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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