श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  1.128.24-25 
तत: स्नातो महाबाहु: शुचि: शुक्लाम्बरस्रज:।
ततो नागस्य भवने कृतकौतुकमङ्गल:॥ २४॥
ओषधीभिर्विषघ्नीभि: सुरभीभिर्विशेषत:।
भुक्तवान् परमान्नं च नागैर्दत्तं महाबल:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबाहु भीमसेन ने स्नान करके शुद्धि की। उन्होंने श्वेत वस्त्र धारण किए और श्वेत पुष्पों की माला धारण की। तत्पश्चात् नागराज के घर में उनका पूजन और आशीर्वाद हुआ। तत्पश्चात् उन महाबाहु भीमसेन ने विषनाशक सुगन्धित औषधियों सहित सर्पों द्वारा दी गई खीर का सेवन किया। 24-25॥
 
Then mighty-armed Bhimsen took bath and became pure. He wore white clothes and a garland of white flowers. After that, prayers and blessings were performed for him in the house of Nagraj. Then that mighty Bhima ate the pudding given by the snakes along with anti-poisonous aromatic medicines. 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)