Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.127.21: जब कौरव फल तोड़ने के लिए पेड़ों पर चढ़ते थे, तो भीमसेन पेड़ों को लात मारकर हिला देते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.127.21 
फलानि वृक्षमारुह्य विचिन्वन्ति च ते तदा।
तदा पादप्रहारेण भीम: कम्पयते द्रुमान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब कौरव फल तोड़ने के लिए पेड़ों पर चढ़ते थे, तो भीमसेन पेड़ों को लात मारकर हिला देते थे।
 
When the Kauravas climbed trees to pluck fruits, Bhimasena would kick the trees and shake them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)