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mahabharat 1.127.10: 'अम्बिके! तुम्हारे पौत्र के अन्याय के कारण भरत के शूरवीर पुरुष तथा इस नगर के निवासी अपने बन्धु-बान्धवों सहित नष्ट हो जायेंगे - ऐसी बात मैंने सुनी है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.127.10 
अम्बिके तव पौत्रस्य दुर्नयात् किल भारता:।
सानुबन्धा विनङ्क्ष्यन्ति पौराश्चैवेति न: श्रुतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'अम्बिके! तुम्हारे पौत्र के अन्याय के कारण भरत के शूरवीर पुरुष तथा इस नगर के निवासी अपने बन्धु-बान्धवों सहित नष्ट हो जायेंगे - ऐसी बात मैंने सुनी है॥10॥
 
'Ambike! Due to the injustice of your grandson, the brave men of Bharat and the people of this city along with their relatives will be destroyed - I have heard such a thing. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)