श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 126: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई-बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.126.11 
रत्नानि चाप्युपादाय बहूनि शतशो नरा:।
प्रददु: काङ्क्षमाणेभ्य: पाण्डोस्तस्यौर्ध्वदेहिके॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाराजा पाण्डु के दाह संस्कार के दिन सैकड़ों लोगों ने अनेक रत्न लेकर भिखारियों को दान कर दिए।
 
On the day of cremation of Maharaja Pandu, hundreds of people took many gems and gave them to the beggars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)