श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 121: पाण्डुका कुन्तीको समझाना और कुन्तीका पतिकी आज्ञासे पुत्रोत्पत्तिके लिये धर्मदेवताका आवाहन करनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.121.21 
वैशम्पायन उवाच
सा तथोक्ता तथेत्युक्त्वा तेन भर्त्रा वराङ्गना।
अभिवाद्याभ्यनुज्ञाता प्रदक्षिणमवर्तत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे राजन! अपने पति पाण्डु की यह बात सुनकर स्त्रियों में श्रेष्ठ कुन्ती ने उन्हें 'ऐसा ही हो' कहकर प्रणाम किया और उनकी आज्ञा लेकर उनकी प्रदक्षिणा की।
 
Vaishmpayana says: O King! Upon hearing her husband Pandu say this, Kunti, the best of women, bowed to him saying 'So be it' and after taking his permission circumambulated him.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि कुन्तीपुत्रोत्पत्त्यनुज्ञाने एकविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें कुन्तीको पुत्रोत्पत्तिके लिये आदेशविषयक एक सौ इक्‍कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२१॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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