श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 121: पाण्डुका कुन्तीको समझाना और कुन्तीका पतिकी आज्ञासे पुत्रोत्पत्तिके लिये धर्मदेवताका आवाहन करनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.121.14 
तस्य तस्य प्रसादात् ते राज्ञि पुत्रो भविष्यति।
इत्युक्ताहं तदानेन पितृवेश्मनि भारत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
"राजकुमारी! उस देवता की कृपा से तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी।" हे भरत! उस ब्राह्मण ने उस समय मेरे पिता के घर में मुझसे यही कहा था।
 
"Princess! By the grace of that deity you will have a son." O Bharata! This is what that Brahmin said to me at that time in my father's house. 14.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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