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श्लोक 1.121.13  |
यं यं देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि।
अकामो वा सकामो वा वशं ते समुपैष्यति॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| इस मन्त्र से तुम जिस भी देवता का आवाहन करोगे, चाहे वह निःस्वार्थ भाव से हो या कामना से, वह अवश्य ही तुम्हारे अधीन हो जाएगा॥13॥ |
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| 'Whichever deity you invoke with this mantra, whether it is selfless or with a desire, will certainly become subservient to you.॥ 13॥ |
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