श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 121: पाण्डुका कुन्तीको समझाना और कुन्तीका पतिकी आज्ञासे पुत्रोत्पत्तिके लिये धर्मदेवताका आवाहन करनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.121.13 
यं यं देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि।
अकामो वा सकामो वा वशं ते समुपैष्यति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस मन्त्र से तुम जिस भी देवता का आवाहन करोगे, चाहे वह निःस्वार्थ भाव से हो या कामना से, वह अवश्य ही तुम्हारे अधीन हो जाएगा॥13॥
 
'Whichever deity you invoke with this mantra, whether it is selfless or with a desire, will certainly become subservient to you.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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