श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.120.37 
तथा त्वमपि मय्येवं मनसा भरतर्षभ।
शक्तो जनयितुं पुत्रांस्तपोयोगबलान्वित:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंश के मुखिया! इसी प्रकार आप भी मन के संकल्प से मेरे गर्भ से बहुत से पुत्र उत्पन्न कर सकते हैं; क्योंकि आप तप और योगबल से संपन्न हैं॥37॥
 
O head of the Bharata dynasty! Similarly, you too can produce many sons from my womb by mental resolve; because you are blessed with austerity and the power of yoga. ॥ 37॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि व्युषिताश्वोपाख्याने विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें व्युषिताश्वोपाख्यानविषयक एक सौ बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२०॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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