श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.120.34 
आत्मकीये वरारोहे शयनीये चतुर्दशीम्।
अष्टमीं वा ऋतुस्नाता संविशेथा मया सह॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'वरारोहे! चतुर्दशी या अष्टमी की रात्रि में जब तुम्हारा मासिक धर्म हो जाए, तब तुम मेरे शव के साथ अपनी शय्या पर जाकर सो जाना।'॥34॥
 
'Vararohe! When you attain your period on the night of Chaturdashi or Ashtami, go and sleep with my corpse on your bed.'॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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