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श्लोक 1.120.34  |
आत्मकीये वरारोहे शयनीये चतुर्दशीम्।
अष्टमीं वा ऋतुस्नाता संविशेथा मया सह॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| 'वरारोहे! चतुर्दशी या अष्टमी की रात्रि में जब तुम्हारा मासिक धर्म हो जाए, तब तुम मेरे शव के साथ अपनी शय्या पर जाकर सो जाना।'॥34॥ |
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| 'Vararohe! When you attain your period on the night of Chaturdashi or Ashtami, go and sleep with my corpse on your bed.'॥ 34॥ |
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