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श्लोक 1.120.32  |
कुन्त्युवाच
एवं बहुविधं तस्यां विलपन्त्यां पुन: पुन:।
तं शवं सम्परिष्वज्य वाक् किलान्तर्हिताब्रवीत्॥ ३२॥ |
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| अनुवाद |
| कुन्ती बोली - महाराज ! इस प्रकार जब वह राजा के शव से लिपटकर बार-बार अनेक प्रकार से विलाप करने लगी, तब आकाशवाणी हुई -॥32॥ |
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| Kunti said - Maharaj! In this way, when she embraced the corpse of the king and started lamenting in many ways again and again, then a voice from the sky said -॥ 32॥ |
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