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श्लोक 1.120.3  |
त्वमेव तु महाबाहो मय्यपत्यानि भारत।
वीर वीर्योपपन्नानि धर्मतो जनयिष्यसि॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| हे महाबली भरत! तुम ही मेरे गर्भ से धर्मपूर्वक बहुत से वीर पुत्र उत्पन्न करोगे॥3॥ |
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| 'O mighty brave Bharata! You alone will produce many valiant sons from my womb in a righteous manner.॥ 3॥ |
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