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श्लोक 1.120.28  |
विप्रयुक्ता तु या पत्या मुहूर्तमपि जीवति।
दु:खं जीवति सा पापा नरकस्थेव पार्थिव॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! यदि कोई स्त्री अपने पति से अलग होकर कुछ क्षण भी जीवित रहती है, तो वह पापिनी नरक में पड़े हुए के समान दुःख में अपना जीवन बिताती है॥ 28॥ |
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| Maharaj! If a woman is separated from her husband and lives even for a few moments, that sinner spends her life in misery as if she is in hell.॥ 28॥ |
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