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श्लोक 1.120.24  |
पृष्ठतोऽनुगमिष्यामि समेषु विषमेषु च।
त्वामहं नरशार्दूल गच्छन्तमनिवर्तितुम्॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुरुषश्रेष्ठ! जहाँ तुम कभी न लौटने के लिए गए हो, वहाँ का मार्ग चाहे सुगम हो या दुर्गम, मैं अवश्य तुम्हारे पीछे चलूँगा॥ 24॥ |
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| O best of men! Where you have gone never to return, whether the path there is smooth or rough, I will surely follow you.॥ 24॥ |
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