Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.120.22-23: हे क्षत्रियश्रेष्ठ! पति के वियोग में स्त्री का मर जाना ही श्रेयस्कर है। अतः मैं भी आपके मार्ग पर चलना चाहती हूँ। कृपया प्रसन्न होकर मुझे अपने साथ ले चलें। आपके बिना मुझमें एक क्षण भी जीने का साहस नहीं है। हे राजन! कृपया मुझे शीघ्र ही यहाँ से ले चलें। | mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे क्षत्रियश्रेष्ठ! पति के वियोग में स्त्री का मर जाना ही श्रेयस्कर है। अतः मैं भी आपके मार्ग पर चलना चाहती हूँ। कृपया प्रसन्न होकर मुझे अपने साथ ले चलें। आपके बिना मुझमें एक क्षण भी जीने का साहस नहीं है। हे राजन! कृपया मुझे शीघ्र ही यहाँ से ले चलें।
O great Kshatriya! It is good for a woman to die in the absence of her husband. Therefore, I also want to follow your path. Please be happy and take me with you. I do not have the courage to live even for a moment without you. O King! Kindly take me away from here quickly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥