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mahabharat 1.120.21: भद्रा बोली - हे धर्म के महान ज्ञाता महाराज! जो विधवा स्त्री पति के बिना रहती है, वह वास्तव में जीवित नहीं है, क्योंकि वह निरंतर दुःख में डूबी रहती है; बल्कि वह मृत समान है।   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.120.21 
भद्रोवाच
नारी परमधर्मज्ञ सर्वा भर्तृविनाकृता।
पतिं विना जीवति या न सा जीवति दु:खिता॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भद्रा बोली - हे धर्म के महान ज्ञाता महाराज! जो विधवा स्त्री पति के बिना रहती है, वह वास्तव में जीवित नहीं है, क्योंकि वह निरंतर दुःख में डूबी रहती है; बल्कि वह मृत समान है।
 
Bhadra said - O great scholar of Dharma, Maharaj! Any widow who lives without her husband is not really alive because she is immersed in constant sorrow; rather she is like a dead person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)