श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.120.16 
अनन्तरत्नान्यादाय स जहार महाक्रतून्।
सुषाव च बहून् सोमान् सोमसंस्थास्ततान च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अनन्त रत्नों का दान पाकर उसने महान् यज्ञ किये। उसने अनेक सोमयागों का आयोजन करके उनमें बहुत-सा सोमरस एकत्रित किया तथा अग्निष्टोम, अत्याग्निष्टोम आदि सात प्रकार के सोमयाग भी किये।॥16॥
 
‘After receiving gifts of infinite gems, he performed great sacrifices. He organised many Somayagas and collected a lot of Soma juice in them and also performed seven types of Somayagas like Agnishtom, Atyagnistom etc.॥ 16॥
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