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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश
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श्लोक 4
श्लोक
1.119.4
स तु कालेन महता प्राप्य निष्कल्मषं तप:।
ब्रह्मर्षिसदृश: पाण्डुर्बभूव भरतर्षभ॥ ४॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ जनमेजय! राजा पाण्डु दीर्घकाल तक निष्पाप तपस्या करके ब्रह्मर्षियों के समान प्रभावशाली हो गये थे॥4॥
Bharatshreshtha Janamejaya! King Pandu had become as influential as the Brahmarishis by practicing sinless penance for a long time. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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